उत्तराखण्ड
19 मार्च 2026
सरकार का पक्ष हाईकोर्ट में मजबूती से रखने के लिए विधिक अधिकारियों को सूची जारी
नैनीताल। सरकार ने हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखने के लिए विधिक अधिकारियों की नई सूची जारी की है. राज्यपाल की स्वीकृति के बाद न्याय विभाग द्वारा बुधवार, 18 मार्च 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस नई व्यवस्था के तहत कई अनुभवी अधिवक्ताओं की पदोन्नति की गई है, वहीं कई नए चेहरों को भी सरकारी पैनल में जगह दी गई है.
सूची के अनुसार मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत के स्थान पर वर्तमान अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता पूरन सिंह बिष्ट को मुख्य स्थायी अधिवक्ता बनाया गया है. शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पांच वरिष्ठ विधि अधिकारियों के पदों में तत्काल प्रभाव से अपग्रेडेशन (उच्चीकरण) किया गया है. इनमें गणेश कांडपाल को अब अपर महाधिवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी क्रम में राजीव सिंह बिष्ट को उप महाधिवक्ता (क्रिमिनल) बनाया गया है. इसके अलावा, राकेश कुमार जोशी, प्रभात कांडपाल और हिमांशु सेन को पदोन्नत कर सहायक शासकीय अधिवक्ता नियुक्त किया गया है.
पदोन्नति के साथ-साथ राज्य सरकार ने 10 अन्य अधिवक्ताओं को भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आबद्ध किया है. इसमें योगेश पाण्डे को उप महाधिवक्ता (सिविल) और घनश्याम जोशी को अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिली है. इनके साथ ही रंजन घिल्डियाल और भानू प्रताप मेर को स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया है. जबकि मनीष बिष्ट, मनोज चन्द्र भट्ट समेत छह अन्य को ब्रीफ होल्डर के रूप में पैनल में शामिल किया गया है.
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि ये नियुक्तियां पूर्णतः श्प्रोफेशनलश् (व्यावसायिक) आधार पर की गई हैं. शासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यह कोई श्सिविल पदश् पर स्थाई नियुक्ति नहीं है. राज्य सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए इन आबद्धताओं को किसी भी समय समाप्त कर सकती है. इसी तरह, नियुक्त अधिवक्ता भी अपनी ओर से लिखित सूचना देकर इस अनुबंध को समाप्त कर सकेंगे.
नई नियुक्तियों के साथ सरकार ने कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. नियुक्त किए गए सभी विधि अधिकारी अपनी आबद्धता की अवधि के दौरान उत्तराखंड राज्य के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में कोई मामला नहीं लड़ सकेंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को राज्य के विरुद्ध कानूनी परामर्श देंगे. सभी अधिकारियों को विधि परामर्शी निर्देशिका के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.
शासन ने यह अपेक्षा की है कि सभी आबद्ध अधिवक्ता राज्य सरकार का पक्ष न्यायालय में पूर्ण तैयारी और मजबूती के साथ रखेंगे. कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक अधिवक्ता को हर महीने अपनी परफॉरमेंस का विवरण निर्धारित प्रारूप में महाधिवक्ता कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा.
