उत्तराखण्ड
24 फरवरी 2026
हल्द्वानी बनभूलपुरा अतिक्रमण बहुचर्चित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, बनभूलपुरा को छावनी में तब्दील
हल्द्वानी। नैनीताल जिले के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण मामले में आज 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है. सुनवाई से पहले जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है. एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और ड्रोन से निगरानी के निर्देश दिए हैं. बनभूलपुरा को छावनी में तब्दील किया है. चप्पे चप्पे में पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है. जिला पुलिस के साथ आरपीएफ, पीएसी, अन्य जिलों की पुलिस को क्षेत्र में तैनात किया गया है. पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है.
बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े बहुचर्चित मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है. सुनवाई को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है. एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी ने खुद बनभूलपुरा क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे इलाके की ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है. संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स लगाई गई है. साथ ही अराजक तत्वों पर विशेष नजर रखी जा रही है.
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया पर भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई की जाए. साथ ही शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों से संवाद भी किया जा रहा है.
गौरतलब है कि बनभूलपुरा में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण बताया जा रहा है. इस भूमि पर करीब 3660 मकान बने हैं, जिनमें 5236 परिवार निवास करते हैं. कुल मिलाकर हजारों की संख्या में आबादी इस क्षेत्र में रहती है. मामला संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि बड़ी संख्या में परिवारों का भविष्य इस निर्णय से जुड़ा हुआ है.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में बनभूलपुरा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रभावित पक्षों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए स्थिति यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए थे. इसके बाद फरवरी 2023 में सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार और रेलवे से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई. मार्च 2023 में पुनः सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुनर्वास और मानवीय पहलुओं पर भी विचार करने की बात कही थी.
