काशीपुर जंक्शन हो रहा पूर्वाेत्तर रेलवे की उपेक्षा का शिकार, नही मिल रही नई ट्रेने

काशीपुर जंक्शन हो रहा पूर्वाेत्तर रेलवे की उपेक्षा का शिकार, नही मिल रही नई ट्रेने

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उत्तराखण्ड
3 मई 2026
काशीपुर जंक्शन हो रहा पूर्वाेत्तर रेलवे की उपेक्षा का शिकार, नही मिल रही नई ट्रेने
काशीपुर। पूर्वाेत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाला काशीपुर जंक्शन लगातार उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। लंबे समय से काशीपुर को एक भी नई लंबी दूरी की ट्रेन नहीं दी गई, उल्टा पहले से संचालित कई गाड़ियों को बंद कर दिया गया। स्थिति यह है कि जहां लालकुआं जंक्शन से नई-नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा रहा है, परन्तु उन ट्रेनांे को रामनगर-काशीपुर से नहीं जोड़ा (संचालन) नहीं किया जा रहा। वहीं औद्योगिक नगरी काशीपुर और प्रमुख पर्यटन स्थल रामनगर को रेल कनेक्टिविटी से लगभग बाहर कर दिया गया है। इस मुद्दे को लेकर नगर क्षेत्र के तमाम संगठनों ने पूर्वाेत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल को समय-समय पर पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। उसके बावजूद काशीपुर से जम्मूतवी, चंडीगढ़ अमृतसर, देहरादून और लखनऊ के लिए नई लंबी दूरी की ट्रेनों का शीघ्र संचालन शुरू करने की मांग की है। कई मंचों ने यह भी मांग उठाई है कि काशीपुर जंक्शन को लालकुआं जंक्शन से लिंक ट्रेनों के माध्यम से जोड़ा जाए और लालकुआं से मुरादाबाद होकर चलने वाली कुछ गाड़ियों का संचालन वाया काशीपुर किया जाए। कई मंचों द्वारा अपने पत्रों में यह भी कहा गया है कि रामनगर काशीपुर जंक्शन से सुबह 5 से 6 बजे के बीच मुरादाबाद के लिए एक नियमित ट्रेन चलाई जाए, ताकि यात्री मुरादाबाद से प्रातः चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को समय पर पकड़ सकें।

रेलवे मंत्रालय ने कुछ समय पूर्व लालकुआं चंडीगढ़ वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव दिया था, जिसका रूट और पासिंग भी तय हो चुकी थी, लेकिन आज तक उस ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि काशीपुर एक ओर हजारों श्रमिकों वाली औद्योगिक नगरी है, वहीं रामनगर कॉर्बेट नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार होने के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है। इसके बावजूद रेलवे विस्तार की जरूरत को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

सवाल यह उठ रहा है कि बार-बार पत्राचार के बावजूद काशोपुर रामनगर की आवाज रेलवे प्रशासन तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रही ? क्या यहां के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को मजबूती से नहीं उठा पा रहे, या फिर इस क्षेत्र को जानबूझकर हाशिये पर रखा जा रहा है?

यहां बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, पूर्वाचंल जगहों श्रमिकों के लिए घर जाना बना रहता है जो ज्यादा रेल सुविधाओं के अभाव का सबसे बड़ा असर उन फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ रहा है। काशीपुर की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों को मजबूरी में पहले मुरादाबाद होकर दिल्ली, लखनऊ व देहरादून जाकर टेªने पकड़नी पड़ती है या बसों से लंबा सफर तय करना पड़ता है। जिससे किराया भी काफी बढ़ जाता है। त्योहार, बीमारी या किसी आपात स्थिति में यह परेशानी और भी विकराल हो जाती है। श्रमिकों का कहना है कि चार दिन की छुट्टी मिलती है, लेकिन दो दिन तो आने-जाने में ही खत्म हो जाते हैं। अगर काशीपुर से सीधी ट्रेन होती, तो परिवार के साथ ठीक से वक्त बिता पाते।

स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही काशीपुर और रामनगर को लंबी दूरी की सीधी रेल सेवाओं से नहीं जोड़ा गया, तो इसका सीधा असर उद्योग, पर्यटन और रोजगार पर पड़ेगा। जनता का सवाल- जब लालकुआं को रेल सौगातें मिल रही है, तो काशीपुर रामनगर को कब मिलेगी विकास की ट्रेन ?

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