उत्तराखण्ड
15 मई 2026
ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर गाइडलाइन जारी
देहरादून। ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर अब तक जिन बातों को मौखिक रूप से कहा जा रहा था, अब उत्तराखंड सरकार ने उसके लिए बकायदा गाइडलाइन भी जारी कर दी है. इसमें वर्क फ्रॉम होम से लेकर ईंधन खपत, स्वदेशी उत्पाद, कृषि क्षेत्र, ऊर्जा विकल्प और सरकारी मितव्ययता से जुड़ी बातों को जोड़ा गया है. जानिए सरकार ने गाइडलाइन में किन बातों को दी है अहमियत?
उत्तराखंड में ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर अब तक जो बातें केवल अपील और सलाह तक सीमित थीं, अब उन्हें सरकार ने औपचारिक दिशा-निर्देशों का रूप दे दिया है. पश्चिमी एशिया में जारी संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों से ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था. इसी कड़ी में अब उत्तराखंड शासन ने भी व्यापक गाइडलाइन जारी करते हुए सरकारी विभागों से लेकर आम जनता तक के लिए कई अहम निर्देश तय किए हैं.
प्रदेश सरकार की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों में वर्क फ्रॉम होम, ईंधन खपत में कमी, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, प्राकृतिक खेती, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और सरकारी मितव्ययता जैसे कई बिंदुओं को शामिल किया गया है. शासन स्तर से जारी यह आदेश प्रभारी मुख्य सचिव आरके सुधांशु के माध्यम से लागू किया गया है. सरकार का उद्देश्य केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच राज्य की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है.
दरअसल, पश्चिमी एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया भर के देशों पर दिखाई दे रहा है. भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं. पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. परिवहन से लेकर उद्योगों तक हर क्षेत्र प्रभावित होता है. ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों को ऊर्जा संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की सलाह दी थी. उत्तराखंड सरकार ने अब उसी दिशा में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है.
वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्य प्रणाली पर जोर- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद ईंधन बचत को लेकर जनता को संदेश दे चुके हैं. उन्होंने अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की पहल भी की थी. अब शासन स्तर से इसे व्यापक रूप में लागू करने का प्रयास किया है. जारी दिशा-निर्देशों में सबसे ज्यादा जोर वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्य प्रणाली पर दिया गया है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होंगी ज्यादातर बैठकें- सरकार ने कहा है कि सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को प्राथमिकता दी जाए. केवल बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए. निजी क्षेत्र को भी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है. माना जा रहा है कि इससे वाहनों की आवाजाही कम होगी और ईंधन की खपत में कमी आएगी.
सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर- स्कूल बसों और सार्वजनिक परिवहन के अधिकतम उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई है. सरकार का मानना है कि यदि निजी वाहनों की जगह ज्यादा लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, तो पेट्रोल और डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.
सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर कम करने के निर्देश- गाइडलाइन में ईंधन बचत के लिए कई सख्त उपाय भी सुझाए गए हैं. इसमें माननीयों और वीआईपी काफिलों में वाहनों की संख्या को 50 फीसदी तक सीमित करने का निर्णय शामिल है. इसके साथ ही सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर (।ब्) का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार ने अनावश्यक रूप से एसी के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने की बात भी कही है.
सजावटी लाइटिंग को कम करने के निर्देश- मॉल, होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी बिजली और ईंधन की बचत सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं. सजावटी रोशनी और अनावश्यक लाइटिंग को सीमित करने के लिए कहा गया है. सरकार का मानना है कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर भी जरूरी है.
लेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर फोकस- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर भी सरकार का विशेष फोकस दिखाई दे रहा है. गाइडलाइन में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात भी कही गई है.
एक दिन होगा नो व्हीकल डे- इसके अलावा कार पूलिंग और साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. शासन ने हफ्ते में एक दिन नो व्हीकल डे मनाने की संभावना पर काम करने को कहा है. सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को साइकिल के माध्यम से कार्यालय आने के लिए भी प्रेरित करने की योजना बनाई गई है.
गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की सलाह- सरकार ने विदेश यात्राओं को लेकर भी मितव्ययता पर जोर दिया है. दिशा-निर्देशों में गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है. घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रवासी भारतीयों को उत्तराखंड में छुट्टियां बिताने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई है. सरकारी अधिकारियों की अनावश्यक विदेशी यात्राओं को सीमित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया नियमों का सख्ती से होगा पालन- स्वदेशी उत्पादों और मेक इन इंडिया अभियान को भी इस गाइडलाइन में प्रमुखता मिली है. त्योहारों और शादी समारोहों में भारतीय उत्पादों और हस्तशिल्प के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की गई है. साथ ही सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
खाद्य तेल की खपत करने पर जोर- खाद्य तेल की खपत को कम करने पर भी सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है. आम जनता को कम तेल वाले भोजन के स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा कर उसमें कमी लाने पर भी विचार किया जा रहा है. खाद्य तेल वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई गई है. ताकि, आयात पर निर्भरता कम की जा सके.
प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने पर फोकस- कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भी कई निर्देश जारी हुए हैं. किसानों को नेचुरल फार्मिंग, जीरो बजट फार्मिंग और बायो इनपुट्स का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं. उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की योजना है. प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के लिए विशेष मार्केट लिंकेज तैयार करने पर भी सरकार काम करेगी.
सोने की खरीद को सीमित रखने की अपील- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सोने की अनावश्यक खरीद को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. सरकार ने नागरिकों से एक साल तक सोने की खरीद को सीमित रखने की अपील की है. ज्वेलर्स और आम लोगों को पुराने आभूषणों के दोबारा इस्तेमाल और री-डिजाइन सेवाओं के लिए प्रेरित करने को कहा गया है. इसके लिए सामाजिक और धार्मिक नेताओं का सहयोग लेने का सुझाव भी दिया गया है.
होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में पीएनजी को प्राथमिकता- पीएनजी और एलपीजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी गाइडलाइन में फोकस किया गया है. होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में पीएनजी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि, गैस संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही गई है.
नेट मीटरिंग अनुमोदनों में तेजी लाने और गोवर्धन योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं को गति देने के निर्देश भी शामिल हैं. इसके साथ ही माइनिंग, सोलर और पावर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में तेजी लाने, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित करने और स्टेट लेवल एंपावर्ड कमेटी के गठन के निर्देश भी दिए गए हैं.
खर्चों में कटौती के साथ ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग पर जोर- निवेश परियोजनाओं की निगरानी और फास्ट ट्रैक अप्रूवल व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही गई है. सरकारी मितव्ययता को लेकर जारी निर्देशों में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया है. सरकार चाहती है कि खर्चों में कटौती के साथ ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए.
उत्तराखंड सरकार की यह नई गाइडलाइन केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा संरक्षण, आर्थिक मितव्ययता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यापक रणनीति के रूप में सामने आई है. आने वाले समय में इन दिशा-निर्देशों का असर सरकारी कामकाज, परिवहन व्यवस्था, कृषि, ऊर्जा और आम लोगों की जीवनशैली पर भी देखने को मिल सकता है.
