एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी को रंगे हाथ गिरफ्तार

एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी को रंगे हाथ गिरफ्तार

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उत्तराखण्ड
2 अप्रैल 2026
एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी को रंगे हाथ गिरफ्तार
देहरादून। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जीरो टॉलरेंस नीति का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से जमीन पर दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में देहरादून जनपद के डोईवाला क्षेत्र में तैनात उप शिक्षा अधिकारी और उनकी महिला सहयोगी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाना सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
सतर्कता सैक्टर देहरादून की ट्रैप टीम ने भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उपशिक्षा अधिकारी/प्रभारी खण्ड शिक्षा अधिकारी डोईवाला धनवीर सिंह बिष्ट एवं एक महिला को 1,00,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना सतर्कता सैक्टर देहरादून में पंजीकृत मु0अ0सं0-7/2026, धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के तहत यह कार्रवाई की गई।
इस घटना को केवल एक कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को साफ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आरटीई प्रतिपूर्ति जैसे संवेदनशील मामले में रिश्वत की मांग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर गरीब बच्चों के अधिकारों के साथ अन्याय भी है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। चाहे अधिकारी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो या मामला किसी भी विभाग से जुड़ा हो, भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर बिना किसी दबाव या संरक्षण के सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
प्रदेश में सतर्कता विभाग एवं अन्य जांच एजेंसियों द्वारा लगातार ट्रैप ऑपरेशन संचालित किए जा रहे हैं और शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लिया जा रहा है। दोषियों को रंगे हाथ पकड़कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है, जिससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही निरंतर सुदृढ़ हो रही है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व में भी स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन नीतियों को प्रभावी रूप से धरातल पर लागू करना ही प्राथमिकता है। यही कारण है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब तेज और परिणामजनक होती नजर आ रही है।
इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से आम जनता का सरकार और प्रशासन पर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। नागरिकों को यह भरोसा मिल रहा है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होगी और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा एवं रिश्वत के प्राप्त हो सकेगा।
देहरादून की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखण्ड में अब भ्रष्टाचार की कीमत चुकानी पड़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार एक स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन स्थापित करने की दिशा में निरंतर ठोस कदम उठा रही है, जो सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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