उत्तराखण्ड
16 जुलाई 2026
खटीमा में राज्य आंदोलनकारी घोषित किए गए लोगों के चिन्हीकरण पर उठे सवाल
काशीपुर। काशीपुर तहसील क्षेत्र के सक्रिय राज्य निर्माण आंदोलनकारियों ने खटीमा में राज्य आंदोलनकारी घोषित किए गए लोगों के चिन्हीकरण पर सवाल उठाते हुए गृह सचिव, उत्तराखंड सरकार के नाम उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। आंदोलनकारियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पात्र आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि खटीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को राज्य आंदोलनकारी घोषित कर दिया गया है, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इनमें कथित रूप से नाबालिग, रक्षा इकाई (उत्तराखंड आंदोलन विरोधी संगठन) से जुड़े लोग तथा वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद खटीमा में निवास करने वाले लोग भी शामिल हैं। आरोप है कि ऐसे लोगों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा देकर पेंशन, आरक्षण, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा और गेस्ट हाउस जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि काशीपुर क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य आंदोलन लगातार छह वर्षों तक चला था और यहां के सक्रिय आंदोलनकारियों का तहसील स्तर पर चिन्हीकरण भी किया जा चुका है। इसके बावजूद चिन्हीकरण समिति द्वारा उन्हें अब तक उचित सम्मान और लाभ नहीं दिया गया, जिससे उनमें गहरा असंतोष है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य निर्माण आंदोलनकारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, राज्यपाल, नैनीताल-ऊधमसिंहनगर सांसद, काशीपुर विधायक, कुमाऊं आयुक्त, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष सहित विभिन्न अधिकारियों और समाचार पत्रों को भी भेजी गई है।
ज्ञापन सौंपने वालों में नीरज ठाकुर, विनय कुमार विश्नोई, प्रदीप कुमार, अनुराग सारस्वत, रामसिंह सैनी, वीरेन्द्र, एडवोकेट उमेश जोशी, एडवोकेट विवेक मिश्रा, सुरेन्द्र गौड़, मोहम्मद रिजवान, मीनू लता गुप्ता, भूपेंद्र सहित बड़ी संख्या में राज्य निर्माण आंदोलनकारी मौजूद रहे
