उत्तराखण्ड
3 जुलाई 2026
सिडकुल की एक कंपनी ने 95 श्रमिकों को ले-ऑफ (Lay-off) नोटिस जारी कर 45 दिनों के लिए काम से किया बाहर
रुद्रपुर: पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र स्थित सिडकुल की एक कंपनी एक बार फिर श्रमिक विवाद को लेकर सुर्खियों में है. कंपनी द्वारा 95 श्रमिकों को ले-ऑफ (Lay-off) नोटिस जारी कर 45 दिनों के लिए काम से बाहर किया है. कंपनी के इस नोटिस का मजदूरों ने विरोध किया है.
श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी सालों से काम कराने के बावजूद अब उन्हें रोजगार से वंचित कर रही है और सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा. मामले में श्रम विभाग ने श्रमिकों की शिकायत सुनने के बाद कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी करने की बात कही है.
वहीं श्रमिकों का कहना है कि वे पिछले 12 से 14 सालों से लगातार कंपनी में कार्यरत हैं, लेकिन अब बिना किसी ठोस कारण के उन्हें काम से दूर कर दिया गया है. धरने पर बैठे श्रमिकों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब कंपनी ने ले-ऑफ का सहारा लिया है.
उनका कहना है कि वर्ष 2018 में भी कंपनी ने करीब 395 से अधिक श्रमिकों को ले-ऑफ के माध्यम से बाहर कर दिया था. इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा और करीब पांच वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद अदालत के हस्तक्षेप से 152 श्रमिकों को दोबारा कंपनी में काम पर रखा गया.
श्रमिकों का आरोप है कि अब एक बार फिर कंपनी ने वर्ष 2026 में 95 कर्मचारियों को ले-ऑफ नोटिस देकर 45 दिनों के लिए बाहर कर दिया है. श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उत्तराखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन (मिनिमम वेज) तक नहीं दिया जा रहा.
उनका कहना है कि लंबे समय से कम वेतन और रोजगार की असुरक्षा के बीच काम करना पड़ रहा है. अब ले-ऑफ के बाद उनके सामने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है.
श्रमिकों ने कहा कि पहले कंपनी में उत्पादन (प्रोडक्शन) अधिक था, लेकिन अब प्रोडक्शन कम कर दिया गया है, जिसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है. अपनी मांगों को लेकर वे लगातार श्रम विभाग और कंपनी परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल इतना है कि उन्हें दोबारा काम पर लिया जाए और उनके श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार सुनिश्चित किए जाएं.
वहीं, इस मामले में श्रम विभाग के लेबर इंस्पेक्टर अरविंद सैनी ने बताया कि
सभी श्रमिक उनके कार्यालय पहुंचे थे और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना गया है. श्रमिकों की शिकायत के आधार पर कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी किया जाएगा. साथ ही दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराकर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा हो सके और औद्योगिक विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके.
-अरविंद सैनी, लेबर इंस्पेक्टर, श्रम विभाग-
फिलहाल कंपनी में ले-ऑफ को लेकर श्रमिकों का विरोध जारी है. अब सभी की निगाहें श्रम विभाग की कार्रवाई और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं. श्रमिकों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा और उन्हें दोबारा रोजगार मिल सकेगा
