बाजपुर में फर्जी स्थाई और जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, चार गिरफ्तार

बाजपुर में फर्जी स्थाई और जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, चार गिरफ्तार

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उत्तराखण्ड
25 सितम्बर 2026
बाजपुर में फर्जी स्थाई और जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, चार गिरफ्तार
बाजपुर। बाजपुर में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्थाई और जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें चार महिलाएं भी शामिल हैं।

उधम सिंह नगर जिले में भी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए फर्जी पते और कूटरचित दस्तावेजों के आधार परप्रमाण पत्र बनवाने का मामलासामने आया है. मामला बाजपुर तहसील क्षेत्र का है. उधम सिंह नगर जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई जांच में संबंधित अभ्यर्थियों के बताए पते पर निवास नहीं करने की पुष्टि हुई. प्रशासन ने प्रमाण पत्र निरस्त करते हुए एक अधिवक्ता समेत चार लोगों के खिलाफ बाजपुर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया. साथ ही पूर्व में जारी प्रमाण पत्रों का भी दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया गया है.

जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के निर्देश पर 23 सितंबर 2026 को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से सत्यापन के लिए प्राप्त प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई. बाजपुर तहसील क्षेत्र से संबंधित प्रमाण पत्रों के भौतिक सत्यापन के लिए उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह के निर्देश पर राजस्व उप निरीक्षक और राजस्व टीम ने स्थलीय जांच की.

प्रशासन के अनुसार स्थलीय सत्यापन के दौरान संबंधित अभ्यर्थी प्रमाण पत्रों में दर्ज पते पर निवासरत नहीं पाए गए. इसके बाद प्रमाण पत्रों के साथ लगाए गए दस्तावेजों की संबंधित विभागों से जांच कराई गई. जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्थानीय लोगों की सहायता से गलत पते और कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाए थे.

इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित अभ्यर्थियों के परिजनों को तहसील में बुलाकर पूछताछ की. अपर जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर, उप जिलाधिकारी बाजपुर, तहसीलदार बाजपुर और राजस्व टीम की मौजूदगी में परिजनों व अन्य संबंधित लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए. पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन ने फर्जी पाए गए प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया.

बताया जा रहा है कि जुलाई माह में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों से मोटी रकम लेकर स्थाई और जाति प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे। मामले का खुलासा होने पर एडीएम पंकज उपाध्याय के निर्देशन में बुधवार देर रात तक तहसील में जांच-पड़ताल चली।सीओ अखलेश कुमार ने बताया कि तहसील के राजस्व निरीक्षक अजमल खान की तहरीर पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में चार महिलाओं सहित नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस ने सभी संबंधितों को कार्रवाई के लिए कोतवाली बाजपुर के सुपुर्द किया है. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामला केवल सामने आए प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं रहेगा. उप जिलाधिकारी बाजपुर के निर्देश पर तहसील से पूर्व में जारी किए गए प्रमाण पत्रों का भी पुनः सत्यापन कराया जा रहा है.

ऋचा सिंह, उप जिला अधिकारी, बाजपुर ने बताया कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य प्रमाण पत्र में भी फर्जी पता, कूटरचित दस्तावेज या गलत साक्ष्य का इस्तेमाल पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच आख्या तैयार कर जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर को आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है.

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए जारी होने वाले प्रमाण पत्रों के सत्यापन और दस्तावेजों की जांच व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता बढ़ गई है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले में आगे की जांच कर रहे हैं

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