उत्तराखण्ड
12 सितम्बर 2026
युवाओं के सामने नई चुनौती – सफेद नंबर प्लेट से डिलीवरी और रैपिडो राइड पर लगेगा ब्रेक
देहरादून। उत्तराखंड में निजी बाइक और स्कूटी का इस्तेमाल कर डिलीवरी सेवा या सवारी ढोने वाले हजारों युवाओं के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग मोटर वाहन नियमों के खिलाफ है.
ऐसे में अब रैपिडो, जोमैटो, स्विगी और अन्य डोर-टू-डोर सेवाओं से जुड़े लोगों को कमर्शियल यानी पीले नंबर की प्लेट लेनी होगी.
कई शहरों में पड़ेगा बड़ा असर
इस फैसले का असर देहरादून, ऋषिकेश, श्रीनगर, हरिद्वार, नैनीताल, हल्द्वानी, टिहरी, रुद्रपुर, काशीपुर, बाजपुर और सितारगंज समेत कई शहरों में देखने को मिल सकता है. इन शहरों में बड़ी संख्या में युवा निजी बाइक और स्कूटी के जरिए फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी सप्लाई और राइडिंग सेवाओं से अपनी आजीविका चला रहे हैं. अब इन सेवाओं के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इसके लिए वाहन को कमर्शियल श्रेणी में रजिस्टर कराना होगा.
परिवहन विभाग ने क्यों लिया फैसला?
उत्तराखंड परिवहन विभाग के उपआयुक्त शैलेश तिवारी के अनुसार निजी वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन है. उनका कहना है कि कमर्शियल वाहन चलाने वाले लोग टैक्स, परमिट और फिटनेस जैसी शर्तों का पालन करते हैं. ऐसे में निजी वाहन से कमाई करने वालों को छूट मिलने से नियमों का पालन करने वाले वाहन मालिकों को नुकसान होता है. इसी वजह से विभाग अब ऐसे मामलों पर सख्ती करने की तैयारी में है और कमर्शियल नंबर प्लेट को अनिवार्य बनाने पर जोर दे रहा है.
डिलीवरी बॉय बोले, कमाई पर पड़ेगा असर
इस फैसले से सबसे ज्यादा चिंता डिलीवरी और राइडिंग का काम करने वाले युवाओं में है. कई डिलीवरी बॉय का कहना है कि महीने भर की मेहनत के बाद करीब 25 हजार रुपये की कमाई होती है. पेट्रोल, वाहन मेंटेनेंस और अन्य खर्च निकालने के बाद लगभग 17 हजार रुपये ही बचते हैं. कमर्शियल नंबर लेने और अतिरिक्त खर्च उठाने के बाद यह काम करना मुश्किल हो जाएगा. उनका कहना है कि कई बार 18 घंटे तक काम करने के बाद भी सिर्फ 1000 से 1200 रुपये प्रतिदिन की कमाई हो पाती है. इसी रकम से उन्हें ईंधन और दूसरे खर्च भी निकालने पड़ते हैं. उनका मानना है कि नए नियमों से आय और कम हो सकती है.
पढ़ाई करने वाले युवाओं की भी बढ़ी चिंता
जैसे कई छात्र पढ़ाई के साथ डिलीवरी का काम कर अपने अतिरिक्त खर्च पूरे करते हैं. उनका कहना है कि बेरोजगारी के दौर में यह काम युवाओं के लिए आय का आसान विकल्प बना हुआ है. अगर निजी बाइक से काम करने पर अतिरिक्त टैक्स और दूसरी शर्तें लागू हुईं तो हजारों युवाओं की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है
