उत्तराखण्ड
7 अप्रैल 2026
शिक्षा विभाग ने जारी किया स्कूलों का टाइम टेबल
देहरादून। उत्तराखंड में स्कूलों के लिए टाइम शेड्यूल तय किया गया है. इसमें न केवल स्कूलों के खुलने और बंद होने बल्कि पीरियड्स का समय भी सुनिश्चित कर दिया गया है. इसके तहत, सचिव शिक्षा की तरफ से किए गए आदेश अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए मानने जरूरी होंगे.
उत्तराखंड में स्कूलों की मनमानी टाइमिंग पर अब रोक लगने जा रही है. राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक समान समय सारणी लागू करने का निर्णय लिया है. शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब स्कूलों के खुलने और बंद होने का समय ही नहीं बल्कि प्रार्थना सभा और सभी पीरियड की अवधि भी तय कर दी गई है. शिक्षा सचिव रविनाथ रमन की ओर से जारी आदेश के तहत यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होगी और सभी स्कूलों को इसका पालन करना अनिवार्य होगा.
दरअसल, लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कई निजी स्कूल अपनी सुविधानुसार स्कूलों की टाइमिंग तय करते हैं. कुछ स्कूल बहुत जल्दी छात्रों को बुला लेते हैं तो कुछ देर तक कक्षाएं चलाते हैं. इससे बच्चों और अभिभावकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी राजकीय, निजी माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के लिए एक तय समय सारणी लागू करने का निर्णय लिया है.
शासनादेश के अनुसार, स्कूलों के लिए ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन दो अलग-अलग समय सारणी निर्धारित की गई है. ग्रीष्मकालीन समय सारणी 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक लागू रहेगी, जबकि शीतकालीन समय सारणी 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक प्रभावी होगी.
ग्रीष्मकालीन समय सारणी के अनुसार, स्कूलों में प्रार्थना सभा सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 8 बजकर 5 मिनट तक होगी. जिसकी अवधि 20 मिनट निर्धारित की गई है. इसके बाद पहला पीरियड सुबह 8 बजकर 5 मिनट से 8 बजकर 45 मिनट तक चलेगा. दूसरा पीरियड सुबह 8 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तक होगा. तीसरा पीरियड 9 बजकर 25 मिनट से 10 बजकर 5 मिनट तक निर्धारित किया गया है.
इसके बाद चौथा पीरियड सुबह 10 बजकर 5 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक चलेगा. इसके बाद मध्यांतर का समय रखा गया है, जो सुबह 10 बजकर 45 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. मध्यांतर के बाद पांचवां पीरियड 11 बजकर 25 मिनट से 12 बजकर 5 मिनट तक निर्धारित किया गया है. छठा पीरियड 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक चलेगा. सातवां पीरियड 12 बजकर 45 मिनट से दोपहर 1 बजकर 25 मिनट तक होगा. इसके बाद आठवां और अंतिम पीरियड दोपहर 1 बजकर 25 मिनट से 2 बजकर 5 मिनट तक संचालित किया जाएगा.
वहीं, शीतकालीन समय सारणी में स्कूलों की टाइमिंग कुछ देर से शुरू होगी. इसके अनुसार प्रार्थना सभा सुबह 8 बजकर 50 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक आयोजित की जाएगी. इसके बाद पहला पीरियड सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट तक चलेगा. दूसरा पीरियड 9 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक निर्धारित किया गया है. तीसरा पीरियड सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक होगा.
इसके बाद चौथा पीरियड सुबह 11 बजकर 10 मिनट से 11 बजकर 50 मिनट तक संचालित किया जाएगा. इसके बाद मध्यांतर का समय सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. मध्यांतर के बाद पांचवां पीरियड दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक निर्धारित किया गया है. छठा पीरियड दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से 1 बजकर 50 मिनट तक चलेगा. सातवां पीरियड दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 30 मिनट तक और आठवां तथा अंतिम पीरियड 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक संचालित किया जाएगा.
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पीरियड की अवधि 40 मिनट तय की गई है और सभी स्कूलों को इसी व्यवस्था के अनुसार कक्षाएं संचालित करनी होंगी. सरकार का मानना है कि इससे पूरे प्रदेश में पढ़ाई का एक समान ढांचा तैयार होगा और छात्रों को व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण मिलेगा.
हालांकि, इस आदेश को लागू कराना शिक्षा विभाग के लिए आसान नहीं माना जा रहा है. खासकर निजी स्कूलों में इस व्यवस्था का पालन कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि कई बड़े निजी स्कूल अपनी अलग समय सारणी के अनुसार स्कूल संचालित करते रहे हैं. ऐसे में उन्हें सरकार द्वारा तय समय सारणी के अनुसार चलाना शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी.
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस आदेश का उद्देश्य स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाना और शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित बनाना है. यदि पूरे प्रदेश में एक समान समय सारणी लागू होती है तो इससे छात्रों की पढ़ाई में निरंतरता आएगी और शैक्षणिक गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
