उत्तराखण्ड
14 मई 2026
गोल्ड पर घमासान – सर्राफा व्यापारियों का प्रदेशभर में आज विरोध प्रदर्शन
देहरादून। उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों ने सोने पर बढ़े आयात शुल्क और प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील के विरोध में प्रदेशभर में सांकेतिक प्रदर्शन का ऐलान किया है. राजधानी देहरादून समेत कई शहरों में व्यापारी मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करेंगे. 14 मई को प्रदेशभर के सर्राफा व्यापारी अपने-अपने क्षेत्रों में शाम को शांतिपूर्ण सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे. राजधानी देहरादून के धामावाला स्थित सर्राफा बाजार में शाम 7 बजे व्यापारी एकत्र होकर विरोध दर्ज कराएंगे.
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि केंद्र सरकार की हालिया नीति और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपील का सीधा असर देश के स्वर्ण आभूषण बाजार पर पड़ रहा है. उनका तर्क है कि जब देश के सर्वाेच्च स्तर से नागरिकों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील की जाती है, तो इसका सीधा संदेश बाजार में जाता है. ग्राहक खरीदारी से पीछे हटने लगते हैं. इससे छोटे दुकानदारों, पारंपरिक ज्वेलर्स और स्वर्ण आभूषण निर्माण से जुड़े कारीगरों पर गहरा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है.
व्यापारियों ने कहा सोना भारतीय समाज में केवल एक निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है. शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, अक्षय तृतीया, धनतेरस, दीपावली जैसे अनेक अवसरों पर सोने-चांदी की खरीद को शुभ माना जाता है. ऐसे में यदि लोगों को लंबे समय तक सोना न खरीदने का संदेश दिया जाता है, तो यह सीधे तौर पर इस व्यापार से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका को प्रभावित करेगा.
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने हाल में सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया, जिसे वे एकतरफा फैसला मान रहे हैं. उनका कहना है कि पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, ऊपर से आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें और बढ़ गई हैं. परिणामस्वरूप ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं. बाजार में मंदी का माहौल बन रहा है.
सर्राफा व्यापारियों ने इस फैसले का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं बताया. उन्होंने कहा कि इस उद्योग की रीढ़ आभूषण निर्माता और कारीगर हैं, जिनकी आजीविका प्रतिदिन के ऑर्डर पर निर्भर करती है. यदि बिक्री ठप होती है तो सबसे पहले इन्हीं कारीगरों पर संकट आएगा. उत्तराखंड सहित देशभर में हजारों परिवार सोने-चांदी के आभूषण निर्माण से जुड़े हैं. मांग घटने पर रोजगार का संकट गहराने की आशंका जताई गई है.
व्यापारियों ने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले टैक्स संबंधी नीतियों के विरोध में देशभर के सर्राफा व्यापारियों ने लंबे समय तक अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे. उस समय सरकार को व्यापारियों की मांगों पर पुनर्विचार करना पड़ा था. उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति भी उसी तरह का संकट पैदा कर रही है, इसलिए सरकार को सर्राफा उद्योग की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए. व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सर्राफा उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है. स्वर्ण कारोबार के माध्यम से बड़ी मात्रा में जीएसटी और अन्य करों के जरिए राजस्व सरकार को प्राप्त होता है. ऐसे में यदि यह क्षेत्र प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व संग्रह और बाजार गतिविधियों पर भी पड़ेगा.
प्रदेश के व्यापारियों ने सभी जिलों के सर्राफा साथियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से मोमबत्ती जलाकर अपना विरोध दर्ज कराएं. उनका कहना है कि यह प्रदर्शन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाने के लिए है. देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी समेत कई शहरों में व्यापारी एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएंगे.
सर्राफा संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सोने पर बढ़ाए गए आयात शुल्क पर पुनर्विचार किया जाए. ऐसे सार्वजनिक संदेशों से बचा जाए, जिनसे किसी एक व्यापारिक वर्ग पर प्रतिकूल असर पड़े. व्यापारियों का कहना है कि वे देशहित में सरकार की नीतियों का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी निर्णय में उन वर्गों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.
